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मंगलवार, 10 जुलाई 2012


उसी क्रम में बात आगे बढाता हूँ  :
मेघ कुमार सम्राट श्रेणिक का पुत्र था . वह भगवान महावीर के पास दीक्षित     हुआ  दीक्षा  के बाद उसने पूछा, भन्ते ! अब मैं क्या करूँ.
भगवान ने कहा जो आवश्यक  है वह सुब कुछ करो , चलो ,बैठो, सोओ,खडे रहो, खाओ और बोलो .
मेघ कुमार बोला भंते ! दीक्षित  होने से पहले भी मैं ऐसा ही करता था . दीक्षा   की चर्या में क्या अलग होगा .
भगवान ने कहा - अंतर इतना होगा की चलना हो तो जागरूकता के साथ चलो , खाना हो तो जागरूकता के साथ खाओ , बोलना हो तो जागरूकता के साथ बोलो .
दीक्षा  का अर्थ है - जागरूकता.

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