उसी क्रम में बात आगे बढाता हूँ :
मेघ कुमार सम्राट श्रेणिक का पुत्र था . वह भगवान महावीर के पास दीक्षित हुआ दीक्षा के बाद उसने पूछा, भन्ते ! अब मैं क्या करूँ.
भगवान ने कहा जो आवश्यक है वह सुब कुछ करो , चलो ,बैठो, सोओ,खडे रहो, खाओ और बोलो .
मेघ कुमार बोला भंते ! दीक्षित होने से पहले भी मैं ऐसा ही करता था . दीक्षा की चर्या में क्या अलग होगा .
भगवान ने कहा - अंतर इतना होगा की चलना हो तो जागरूकता के साथ चलो , खाना हो तो जागरूकता के साथ खाओ , बोलना हो तो जागरूकता के साथ बोलो .
दीक्षा का अर्थ है - जागरूकता.
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