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शुक्रवार, 13 जुलाई 2012


                    क्या मैं तुमको भूल सकूँगा
 आँखों में  तेरा सपना है
   अधरों पर तेरा स्पंदन
                    तन मन में तेरी लय  गुंजित
                     क्या दूजा सुर  सीख सकूँगा
                         क्या मैं तुमको भूल सकूँगा
     पास रहो तो नयन नयन तुम
      दूर रहो तो करुणा करुणा
                    ऐसे भावुक संबंधों से
                    क्या मैं नाता तोड़ सकूँगा
                क्या मैं तुमको भूल सकूँगा
 
           

4 टिप्‍पणियां:

  1. भैया हमेशा की तरह अप्रतिम......सुन्दर भाव....

    अच्छा ये बताएं....ब्लॉग का नया रूप रंग कैसा लगा ??

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    1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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    2. ब्लॉग का नया रूप अद्भुत है विशेष कर रंगों का चुनाव एवं समायोजन अप्रतिम है .ब्लॉग की पृष्ठभूमि में जो हरियाली का पुट दिया गया हैं वह सावनी छुवन... भाव को अभिव्यक्त करता है. इतने सुंदर ब्लॉग के रंग रूप के लिए बधाई ,.

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    3. आभार भैया......आपको इतना पसंद आया .....कुछ ऐसा ही मैंने भी सोच कर ही ये पृष्ठभूमि पसंद की थी......मैं अपनी सोच से कुछ कुछ परिवर्तन कर रही हूँ अगर आपको कुछ आपतिजनक लगे तो जरूर बताएँगे.......मैं बदल दूँगी...मैंने समर्थको के लिए भी आप्शन डाल दिया है.....जल्दी ही आपके ब्लॉग पसंद करने वाले सन्मुख होंगे.......

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