क्या मैं तुमको भूल सकूँगा
आँखों में तेरा सपना है
अधरों पर तेरा स्पंदन
तन मन में तेरी लय गुंजित
क्या दूजा सुर सीख सकूँगा
क्या मैं तुमको भूल सकूँगा
पास रहो तो नयन नयन तुम
दूर रहो तो करुणा करुणा
ऐसे भावुक संबंधों से
क्या मैं नाता तोड़ सकूँगा
क्या मैं तुमको भूल सकूँगा
भैया हमेशा की तरह अप्रतिम......सुन्दर भाव....
जवाब देंहटाएंअच्छा ये बताएं....ब्लॉग का नया रूप रंग कैसा लगा ??
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हटाएंब्लॉग का नया रूप अद्भुत है विशेष कर रंगों का चुनाव एवं समायोजन अप्रतिम है .ब्लॉग की पृष्ठभूमि में जो हरियाली का पुट दिया गया हैं वह सावनी छुवन... भाव को अभिव्यक्त करता है. इतने सुंदर ब्लॉग के रंग रूप के लिए बधाई ,.
हटाएंआभार भैया......आपको इतना पसंद आया .....कुछ ऐसा ही मैंने भी सोच कर ही ये पृष्ठभूमि पसंद की थी......मैं अपनी सोच से कुछ कुछ परिवर्तन कर रही हूँ अगर आपको कुछ आपतिजनक लगे तो जरूर बताएँगे.......मैं बदल दूँगी...मैंने समर्थको के लिए भी आप्शन डाल दिया है.....जल्दी ही आपके ब्लॉग पसंद करने वाले सन्मुख होंगे.......
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