जीवन एक अविराम संकीर्तन है . जीवन ठहरने का नाम नहीं, यह एक सतत यात्रा है . यह सफ़र खुद में खुद को तलाशने की कोशिश है. इस यात्रा की भाव भूमि पर मेरा एक
गीत
तुम दीपों की चिर आभा हो ,
करुणा के पहले आमंत्रण
मैंने जीवन में अनुभव का ,
शैशव ही देखा था प्रियतम ,
भावों की अनकही कथा में
नीर नयन का मन का दर्पण
तुम वाणी के सजल कथन हो
अर्पण के अनमोल निवेदन
अंगराग सा नेह तुम्हरा
खंडित प्रतिमा में भिन जाता
नेहों की पुलकावली में आ
कौन चितेरा रंग भर जाता
तुम शब्दों के मौन शिखर हो ,
भावों के अनकहे निमंत्रण
सत्य तुम्हरा सत्य रहेगा
जीवन के अनुभव कक्छों में
करुणा भी अनुराग बनेगी
बस पीड़ा के मृदु वक्छों में
तुम वेदों की प्रथम ऋचा हो ,
ऋषियों के पहले अभिमन्त्रण
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