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रविवार, 15 जुलाई 2012

आप का ब्लॉग अनकहे पल देखा कई लेख पढ़ा भी .आप की   शैली, शब्द चयन , प्रस्तुतीकरण, लेखन और अपनी बात को कहने का अंदाज अद्भुत है. वह चाहें माँ  की स्मृति को बयां करता आलेख हो या अदम जी का संस्मरण हो या कॉलेज के दिनों की यादें हो या एक ढाबे में  सिल बट्टे पर वास्तु शिल्प का मिलना . सब कुछ आप की लेखनी  से जीवंत हो उठा है . मेरा अनुरोध है की आप बराबर अपने विचारों , यादों एवं संस्मरणों का लिखना जारी रखें,  मेरी बधाई स्वीकर करें    

1 टिप्पणी:

  1. बहुत बहुत आभार भैया .......मेरी पूरी कोशिश रहेगी .....की कुछ अच्छा लिख सकू......अब आपसे इतना संबल और प्रसंशा मिली है मैं अभिभूत हूँ.......अच्छा एक बात और...आप मेरी टिप्पणियों का प्रत्युत्तर देने के लिए टिप्पणी वाले आप्शन में ही लिखें......अभी इस तरह लिखने से...ये सारे उत्तर आपके ब्लॉग पोस्ट में दिखाए जा रहे हैं.........ब्लॉग पोस्ट में आप सिर्फ अपनी रचनाएँ ही लिखें......

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